किरावली (आगरा)। तहसील किरावली के गांव कराहरा में अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय किसान मजदूर यूनियन (भारत) के बैनर तले किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार को धरने के नौवें दिन भी बड़ी संख्या में किसानों ने प्रशासन के खिलाफ हुंकार भरी और जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रशासन का अल्टीमेटम खत्म, आक्रोश में किसान
किसानों ने याद दिलाया कि 13 मार्च को सड़क पर लेटकर किए गए अनोखे प्रदर्शन के बाद प्रशासन को 5 दिन का समय (अल्टीमेटम) दिया गया था, जिसकी अवधि 18 मार्च को समाप्त हो रही है। किसानों का आरोप है कि समय सीमा पूरी होने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष है।
12 सूत्रीय मांगों में प्रमुख मुद्दे:
किसानों ने साफ किया कि यह लड़ाई क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं को लेकर है:
- स्वास्थ्य सेवाएं: अस्पतालों में स्टाफ और सुविधाओं की भारी कमी।
- शमशान भूमि: घड़ी विचित्र गांव की शमशान भूमि के विवाद का स्थायी समाधान।
- बिजली-पानी: सिंचाई और पीने के पानी के साथ-साथ बिजली की बदहाल आपूर्ति।
- सड़कें और पशुपालन: खराब सड़कों की मरम्मत और आवारा पशुओं से जुड़ी समस्याएं।
19 मार्च को होगा ‘बुद्धि-शुद्धि’ यज्ञ
प्रशासन की उदासीनता से नाराज किसानों ने अब एक अनूठा कदम उठाने का फैसला किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने ऐलान किया कि 19 मार्च को धरना स्थल पर जिला एवं तहसील प्रशासन की “बुद्धि-शुद्धि” के लिए यज्ञ किया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह यज्ञ सोए हुए प्रशासन को जगाने का एक प्रतीकात्मक तरीका है। अगर अब भी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।”
ये रहे मौजूद
धरना स्थल पर संघर्ष का संकल्प लेने वालों में प्रमुख रूप से श्याम सिंह, दलवीर सिंह, हमवीर सिंह, सीताराम प्रधान, महेंद्र सिंह, यशवंत सिंह, बच्चू सिंह भाल, कुंवरपाल सिंह, हरवीर सिंह चौधरी, रज्जो नेता जी, परशुराम, डॉ. विचित्रा, राधेश्याम और सरनाम सिंह सहित दर्जनों किसान शामिल रहे।
