आगरा। साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं, विशेषकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए आज आगरा पुलिस और बैंक अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। पुलिस उपायुक्त (पश्चिमी/साइबर क्राइम) की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में साइबर अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और पीड़ितों की धनराशि सुरक्षित करने के लिए कई बड़े निर्णय लिए गए।
बैठक के मुख्य बिंदु:

- त्वरित फ्रीजिंग: संदिग्ध लेन-देन की सूचना मिलते ही उसे तत्काल रोकने (Hold/Freeze) की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा।
- गोल्डन ऑवर का महत्व: साइबर फ्रॉड की सूचना मिलते ही ‘गोल्डन ऑवर’ (शुरुआती समय) में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, ताकि पैसा अपराधी के खाते से निकलने से पहले ही रोका जा सके।
- जागरूकता अभियान: ग्राहकों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए तरीकों के प्रति सचेत करने के लिए पुलिस और बैंक मिलकर संयुक्त जागरूकता अभियान चलाएंगे। सभी बैंक शाखाओं में साइबर सुरक्षा से संबंधित पोस्टर्स और बैनर्स लगाए जाएंगे।
- नोजल अधिकारियों की सक्रियता: बैंक स्तर पर नोडल अधिकारियों की सक्रियता बढ़ाई जाएगी ताकि पुलिस और बैंकों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बिना किसी देरी के हो सके।
- नियमित चेकिंग: संबंधित थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी समय-समय पर बैंक शाखाओं का दौरा करेंगे और शाखा प्रबंधकों को साइबर सुरक्षा से जुड़े अपडेट्स देते रहेंगे।

पीड़ितों की सुरक्षा सर्वोपरि
पुलिस उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी बैंक साइबर फ्रॉड के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर लें। साइबर क्राइम सेल और बैंकों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर मामलों के शीघ्र निस्तारण और पीड़ितों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।
प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया है कि भविष्य में इस प्रकार की समन्वय बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी ताकि साइबर अपराधियों के बदलते तरीकों पर लगातार निगरानी रखी जा सके।

