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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दामअंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम
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आगरा: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी का असर अब भारतीय घरेलू बाजार पर दिखने लगा है। देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन रिटेलर कंपनियों में से एक, नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया है।

प्रमुख अपडेट्स:

  • कीमतों में वृद्धि: नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम में ₹5 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि की है। कुछ स्थानों पर स्थानीय करों (VAT) के कारण पेट्रोल की कीमत में ₹5.30 प्रति लीटर तक का उछाल देखा गया है।
  • कारण: सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगभग 50% की वृद्धि हुई है। इस महीने की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें 119 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो अब 100 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं।
  • सरकारी बनाम निजी कंपनियां: जहाँ नायरा एनर्जी ने कीमतें बढ़ा दी हैं, वहीं रिलायंस-बीपी (Jio-bp) ने फिलहाल कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, हालांकि वे घाटे में चल रहे हैं। दूसरी ओर, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों ने अप्रैल 2022 से आम जनता के लिए कीमतों को स्थिर बनाए रखा है।

महंगे हुए प्रीमियम ईंधन और थोक डीजल

सरकारी तेल कंपनियों ने सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं, लेकिन प्रीमियम पेट्रोल (95 ऑक्टेन) के दाम में ₹2 प्रति लीटर और औद्योगिक उपयोग के लिए बल्क डीजल की कीमत में करीब ₹22 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की है। इसके चलते दिल्ली में थोक डीजल की कीमत ₹87.67 से बढ़कर ₹109.59 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।

भारत की निर्भरता और चुनौतियां

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88% आयात करता है। आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के जरिए आता है, जहाँ क्षेत्रीय तनाव के कारण सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। निजी कंपनियों का कहना है कि उन्हें सरकारी कंपनियों की तरह कोई सब्सिडी या सहायता नहीं मिलती, जिसके कारण बढ़ती लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालना उनकी मजबूरी बन गई है।

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