किरावली (आगरा): कस्बे के मिनी ग्रामीण स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय कंस मेले के दूसरे दिन शुक्रवार को विशाल कुश्ती दंगल का आयोजन हुआ। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब के नामी पहलवानों ने अखाड़े में अपनी ताकत का लोहा मनवाया।
प्रमुख झलकी और उद्घाटन
दंगल का शुभारंभ समाजसेवी एवं वरिष्ठ भाजपा नेता भूप सिंह इन्दौलिया ने फीता काटकर किया। उन्होंने किरावली के इस ऐतिहासिक दंगल की परंपरा को सराहते हुए आखिरी एक लाख रुपये की कुश्ती के साथ-साथ 51 हजार की दो कुश्तियों का भी प्रायोजन किया। अखाड़े की मिट्टी पर देश के दिग्गज पहलवानों को भिड़ते देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी।

रोमांचक रहे ‘एक लाख’ के महामुकाबले
दंगल का मुख्य आकर्षण एक-एक लाख रुपये की इनामी राशि वाली दो आखिरी कुश्तियां रहीं, जिनमें पहलवानों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली:
- प्रथम महामुकाबला: भूप सिंह इन्दौलिया द्वारा प्रायोजित हरियाणा (मितरोल) के संजय पहलवान और मथुरा (कारब) के अंकित पहलवान के बीच जबरदस्त भिड़ंत हुई। काफी समय तक चले दांव-पेंच के बाद यह मुकाबला बराबरी पर छूटा।
- द्वितीय महामुकाबला: यशपाल सिंह पनवारी द्वारा प्रायोजित कुंडोल के श्यामवीर और त्रिवाया के हरिओम पहलवान के बीच की एक लाख की कुश्ती भी अनिर्णित (बराबर) रही।

51 हजार की कुश्तियों में दिखा दमखम
51 हजार रुपये की इनामी श्रेणियों में भी पहलवानों ने दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी:
- विजेता: चुरियारी के दीपक, सिकरौदा के सौरभ और जारुआ कटरा के प्रदीप ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर मैदान मार लिया।
- बराबरी: जनक (मथुरा) बनाम श्याम, यशपाल (अभुआपुरा) बनाम दम्मू पहलवान (कांजौली), और नवाज अली (पंजाब) बनाम दिगम्बर पहलवान (मांगरोल जाट) के बीच हुए मुकाबले बराबरी पर समाप्त हुए।
अन्य प्रमुख परिणाम
- 11 हजार की कुश्ती: सपा नेता सुरेंद्र चौधरी द्वारा आयोजित मुकाबले में नगला शियोराम के हरिओम ने दिनेश (अकोला) को पराजित किया।
- किरावली के आफताब और रौझोली के प्रवेश ने 5100 रुपये की कुश्तियां जीतीं।
- पूरे दंगल में 1100 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की लगभग 4 दर्जन (48) कुश्तियां लड़ी गईं।
प्रबंधन और गरिमामयी उपस्थिति दंगल के दौरान नरेश इन्दौलिया, होलू पहलवान, अमरपाल मुखिया, राजवीर सिंह प्रधान (भूर्रका) हरि सिंह सूबेदार, तोरन मास्टर और रामनरेश इन्दौलिया अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। अखाड़े का सफल संचालन डोरीलाल इन्दौलिया और पिंकी सरपंच मुड़ियापुरा ने किया, जबकि निर्णायकों (रेफरी) की भूमिका मुकेश, देवेंद्र, गज्जे और जुगे पहलवान ने बखूबी निभाई।

