किरावली (आगरा): 3 अप्रैल को हुई भीषण ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने किरावली क्षेत्र के किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। फसलों की बर्बादी से टूटे किसानों का सब्र मंगलवार को उस समय जवाब दे गया, जब प्रशासन द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट सामने आई। ‘अखण्ड भारत परशुराम सेना’ के नेतृत्व में दर्जनों गांवों के किसानों ने तहसील परिसर में एक दिवसीय उपवास रखकर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

लेखपालों पर ‘ड्राइंग रूम सर्वे’ का आरोप
धरने पर बैठे किसानों ने तहसील प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि लेखपालों ने खेतों पर जाकर धरातली स्थिति देखने के बजाय घर बैठे ही ‘फर्जी’ सर्वे रिपोर्ट तैयार कर दी है।
“खेतों में फसल 60 से 70 प्रतिशत तक तबाह हो चुकी है, लेकिन सरकारी कागजों में नुकसान को महज 8 से 10 प्रतिशत दिखाकर किसानों के जख्मों पर नमक छिड़का जा रहा है।” — आक्रोशित किसान

मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, रखीं 3 प्रमुख मांगें
एसडीएम दिव्या सिंह की अनुपस्थिति में किसानों ने नायब तहसीलदार राजपाल सिंह को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन उग्र होगा। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- संयुक्त सर्वे: कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनाकर हर खेत का दोबारा पारदर्शी सर्वे किया जाए।
- उचित मुआवजा: नुकसान के वास्तविक आकलन के आधार पर तत्काल राहत राशि दी जाए।
- रिपोर्ट निरस्त हो: 72 घंटे के भीतर जल्दबाजी में तैयार की गई भ्रामक रिपोर्ट को तुरंत रद्द किया जाए।
प्रशासन की सफाई: “अभी सर्वे जारी है”
किसानों के बढ़ते दबाव के बीच नायब तहसीलदार राजपाल सिंह ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा:
“अभी केवल 12 से 18 प्रतिशत प्रभावित क्षेत्र का ही सर्वे पूरा हुआ है, प्रक्रिया अभी बंद नहीं हुई है। संपूर्ण रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होगा।”
प्रदर्शन में ये रहे शामिल
प्रदर्शन का नेतृत्व मुख्य रूप से शिशुपाल कटारा और पुरुषोत्तम वशिष्ठ ने किया। इस दौरान ओमप्रकाश शर्मा, रूद्रदेव वशिष्ठ, खेमचंद, राजेश कुमार, मानिक चंद दिवाकर, सत्यवीर सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, रॉकी, संगम, धर्म सिंह और रविकांत शर्मा सहित सैकड़ों किसान उपस्थित रहे।

