रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित लॉर्ड कृष्णा पब्लिक स्कूल की मान्यता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। स्कूल की कथित फर्जी मान्यता के मामले में एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से स्पष्टीकरण मांगते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस (पापा संस्था) द्वारा दायर रिट याचिका (संख्या 13244/2026) पर यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘टॉप-20’ मामलों की सूची में शामिल किया है।
अदालत ने प्रथम दृष्टया स्कूल की मान्यता को संदिग्ध मानते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल मुख्य जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि स्कूल के पास संचालन के लिए वैध दस्तावेज हैं या नहीं।

क्या है पूरा विवाद?
याचिकाकर्ता और ‘पापा संस्था’ के संस्थापक दीपक सरीन ने कोर्ट के समक्ष कई चौंकाने वाले तथ्य रखे:
- सोसाइटी का निरस्तीकरण: आरोप है कि स्कूल चलाने वाली सोसाइटी का पंजीकरण 2011 में ही निरस्त हो गया था, फिर भी 2012 में मान्यता प्राप्त कर ली गई।
- भूमि विवाद: 2015 में स्कूल की भूमि का आंशिक विक्रय और 2018 में पारिवारिक ट्रस्ट के गठन के बाद भी वैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।
- आयुक्त न्यायालय का आदेश: 2023 में कमिश्नर कोर्ट के आदेश के बावजूद स्कूल की मान्यता और संचालन पर संशय बना हुआ है।
अभिभावकों से अपील
मामले की पैरवी कर रहीं अधिवक्ता मेघा त्यागी और अमन आर्या ने इसे जनहित का मुद्दा बताया। याचिकाकर्ता दीपक सरीन ने कहा कि यह हजारों छात्रों के भविष्य और शिक्षा तंत्र की साख से जुड़ा विषय है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे अपने बच्चों का प्रवेश कराने से पहले स्कूल की मान्यता की पूरी जांच पड़ताल अवश्य कर लें।
अगली सुनवाई: 29 अप्रैल 2026 कोर्ट का निर्देश: प्रतिवादी संख्या 8 और 9 को एक सप्ताह में नोटिस जारी करें और CBSE स्थिति स्पष्ट करें।

