रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
किरावली (आगरा)। किरावली की शांत फिजाओं में न्याय की मांग को लेकर संघर्ष का बिगुल फूंक दिया गया है। 30 अप्रैल को सब्जी मंडी में दो कश्यप भाइयों पर हुए जानलेवा हमले और पुलिस की ढीली कार्रवाई के विरोध में पूर्व सैनिक और वरिष्ठ पत्रकार भोज कुमार फौजी मौनी बाबा आश्रम पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने उप जिलाधिकारी (SDM) किरावली को संबोधित एक ज्ञापन सौंपकर न्याय और व्यवस्था सुधार के लिए चार प्रमुख मांगें रखी हैं।

किरावली में न्याय की हुंकार
क्या है पूरा मामला?
बीती 30 अप्रैल को किरावली सब्जी मंडी में मामूली विवाद को लेकर एक समुदाय विशेष के 10-15 लोगों ने गन्ने का रस बेचने वाले दो भाइयों, रवि कश्यप और उसके 14 वर्षीय नाबालिग भाई पर हमला कर दिया था। हमले में रवि के सिर में गंभीर चोट आई, जिसमें 14 टांके लगे हैं। भोज कुमार फौजी का आरोप है कि जानलेवा हमले के बावजूद पुलिस ने मामले को BNS की धारा 109 (हत्या का प्रयास) में दर्ज करने के बजाय मामूली धाराओं में निपटाने की कोशिश की है।
प्रशासन के सामने रखी गई 4 मुख्य मांगें:
भोज कुमार फौजी ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए ये मांगें रखी हैं:
- धारा 109 BNS की वृद्धि: हमले की गंभीरता को देखते हुए मुकदमे में धारा 109 जोड़ी जाए या न जोड़ने का लिखित कारण दिया जाए।
- अवैध सब्जी मंडी का स्थानांतरण: आगरा-जयपुर हाईवे चौराहे पर स्थित अवैध सब्जी मंडी को हटाया जाए, जो आए दिन दुर्घटनाओं और विवादों का केंद्र बनी हुई है।
- बाल श्रम से मुक्ति: क्षेत्र की दुकानों पर काम कर रहे 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मुक्त कराकर उन्हें स्कूल भेजा जाए और मालिकों पर कड़ी कार्रवाई हो।
- फेरी वालों का सत्यापन: गांवों में सामान बेचने वाले बाहरी विक्रेताओं का पुलिस सत्यापन अनिवार्य हो, ताकि असामाजिक तत्वों पर लगाम लग सके।
सामाजिक संगठनों का मिला भारी समर्थन
इस धरने को क्षेत्र के विभिन्न संगठनों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, करणी सेना, बजरंग दल और राष्ट्रीय हिंदू फ्रंट जैसे संगठनों ने धरने पर पहुंचकर अपनी सहमति जताई है। भोज कुमार फौजी ने स्पष्ट किया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, यह धरना जारी रहेगा।
प्रशासन को चेतावनी
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि शासन-प्रशासन के टालमटोल रवैये के कारण जनभावनाएं आहत होती हैं या क्षेत्र में कोई अव्यवस्था फैलती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

