रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
किरावली (आगरा)। तहसील किरावली के अंतर्गत गांव नागर में किसानों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। चकमार्ग संख्या 24 पर पुल निर्माण की मांग को लेकर किसानों का धरना आज 168वें दिन भी जारी रहा। किसानों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि उन्हें ‘पुल’ के अलावा कोई दूसरा विकल्प मंजूर नहीं है। रेलवे प्रशासन की टालमटोल नीति से नाराज किसानों ने अब 1 मई से निर्माणाधीन कीथम-भांडई बाईपास रेलवे लाइन के काम को ठप करने का ऐलान कर दिया है।
11 नवंबर से चल रहा है अनवरत धरना
बता दें कि चकमार्ग बंद होने से प्रभावित किसान बीते 11 नवंबर से बेमियादी धरने पर बैठे हैं। किसानों का कहना है कि रेलवे की तीसरी लाइन डाले जाने से उनका रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। अब उन्हें अपने ही खेतों तक पहुँचने के लिए चार से पांच गुना लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।
प्रशासन और रेलवे की वार्ताएं रहीं बेनतीजा
किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ने बताया कि पूर्व में किसानों की समस्याओं को लेकर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) आजाद भगत और रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के अधिकारियों के साथ दो बार बैठक हुई, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
- 155वां दिन: किरावली उपजिलाधिकारी (SDM) दिव्या सिंह, तहसीलदार दीपांकर और रेलवे अधिकारियों ने मौके पर जाकर किसानों को मनाने का प्रयास किया था।
- किसानों का आरोप: रेलवे प्रशासन पुल बनाने के बजाय ‘वैकल्पिक मार्ग’ का झांसा देकर किसानों को गुमराह कर रहा है।
“हम 11 महीनों से ज्ञापन, घेराव और प्रदर्शन के जरिए अपनी बात कह रहे हैं। रेलवे प्रशासन हमें उग्र आंदोलन के लिए विवश कर रहा है। रेलवे पुल संख्या 31 और 32A के मध्य चकमार्ग पर पुल देना ही होगा।” — चौधरी दिलीप सिंह
1 मई से होगा कार्य बहिष्कार
आंदोलनकारी किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी जायज मांग को स्वीकार नहीं किया, तो 1 मई से वे रेलवे लाइन के निर्माण कार्य को रुकवा कर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। किसानों का कहना है कि वे अपनी जमीन और रास्ते के हक के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
धरने में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे: इस दौरान मेजर दीवान सिंह, सुखपाल सिंह, मुकेश, अजयपाल सिंह, महावीर, भगवान दास, कृष्णवीर और दरियाव सिंह सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय किसान मौजूद रहे।

