रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
किरावली (आगरा)। किरावली सब्जी मंडी में 30 अप्रैल को हुई हिंसक घटना के बाद कस्बे में तनाव और आक्रोश चरम पर है। दो सगे नाबालिग भाइयों पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की ढुलमुल कार्रवाई से नाराज सैकड़ों लोगों ने बुधवार शाम आगरा-जयपुर नेशनल हाईवे पर विशाल कैंडल मार्च निकाला। हाथों में मोमबत्तियां और न्याय की मांग के बैनर थामे महिलाओं और पुरुषों ने “जस्टिस दो” के नारे लगाते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
क्या है पूरा मामला?
किरावली में आक्रोश
बीती 30 अप्रैल को मोटरसाइकिल हटाने के मामूली विवाद में आधा दर्जन से अधिक युवकों ने दो सगे भाइयों पर हमला कर दिया था। इस हमले में एक भाई के सिर में 14 टांके आए हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बावजूद, स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों को नजरअंदाज किया और मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज कर खानापूर्ति कर दी।
किरावली में आक्रोश
पुलिस पर गंभीर आरोप: “बदलवा दी गई तहरीर”
पीड़ित पक्ष और प्रदर्शनकारियों ने थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि:
- पुलिस ने पीड़ितों की मूल तहरीर लेने से मना कर दिया और अपनी मर्जी से तहरीर लिखवाई।
- डिजिटल सबूत (वीडियो) होने के बाद भी कठोर धाराएं नहीं लगाई गईं।
- दोषियों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मोनी बाबा आश्रम पर 4 दिनों से धरना जारी
पुलिसिया कार्रवाई से असंतुष्ट हिंदू संगठनों और स्थानीय निवासियों ने समाजसेवी भोज कुमार फौजी के नेतृत्व में मोनी बाबा आश्रम पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। बुधवार को आंदोलनकारियों ने किरावली तहसील पहुंचकर उपजिलाधिकारी (SDM) दिव्या सिंह को धरने की अनुमति हेतु प्रार्थना पत्र सौंपा।
प्रशासन का रुख और अन्य मांगें
SDM दिव्या सिंह ने बताया कि पुलिस जांच के बाद ही धरने की अनुमति दी जाएगी, हालांकि उन्होंने मंडी परिसर में बाल श्रम के खिलाफ औचक निरीक्षण और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रदर्शनकारियों ने हमले के साथ-साथ तीन अन्य प्रमुख मांगें भी उठाई हैं:
- मंडी और कस्बे में बाल श्रम पर पूर्ण रोक।
- हाईवे किनारे से अवैध अतिक्रमण हटाना।
- ठेला-फेरी लगाने वालों का पुलिस सत्यापन (Verification)।
न्याय न मिलने पर होगा उग्र आंदोलन
कैंडल मार्च के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शनकारियों और पीड़ितों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर कड़ी धाराएं लगाकर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाएंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे।

