रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
आगरा: जिले में सहकारी समितियों के गोदाम निर्माण में हुए कथित करोड़ों के घोटाले को लेकर प्रशासन अब सख्त रुख अपना रहा है। किसान नेता श्याम सिंह चाहर की लगातार शिकायतों के बाद जिलाधिकारी मनीष बंसल ने जांच रिपोर्ट लंबित रखने के दोषी सात अधिकारियों के वेतन रोकने के आदेश जारी कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्रदेश सरकार ने जिले की सहकारी समितियों पर 21 गोदामों के निर्माण के लिए करीब 4.12 करोड़ रुपये जारी किए थे। आरोप है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। कई स्थानों पर काम अधूरा पड़ा है, जबकि कागजों में इसे पूरा दिखाया जा रहा है।

इन 7 अधिकारियों पर गिरी गाज:
जिलाधिकारी ने 29 अप्रैल को आदेश जारी कर जांच रिपोर्ट आने तक इन अधिकारियों का वेतन रोक दिया है:
- सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता।
- अधिशासी अभियंता (प्रांतीय खंड, PWD)।
- अधिशासी अभियंता (जल निगम ग्रामीण)।
- सहायक अभियंता (भवन, PWD)।
- अधिशासी अभियंता (निर्माण खंड, PWD)।
- अधिशासी अभियंता (सिंचाई विभाग)।
- सहायक अभियंता (PMGSY/RED, आगरा)।
फर्जीवाड़े का खुलासा:
प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस घोटाले में फर्जी फर्म, फर्जी एफडीआर और [Aadhaar Redacted] के जरिए टेंडर हासिल किए गए थे। इस मामले में संबंधित फर्म और संचालक के खिलाफ पहले ही मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया जा चुका है।
ग्राउंड जीरो का हाल (ककुआ समिति):
किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने गुरुवार को अपने साथियों के साथ ककुआ समिति का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि वहां एक साल बाद भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जो अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का जीता-जागता सबूत है।
आरोप: ठेकेदारों के दबाव में थे अधिकारी
श्याम सिंह चाहर ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली ठेकेदारों के दबाव के कारण अधिकारी 15 महीनों से जांच को लटकाए हुए थे। तत्कालीन जिलाधिकारी ने जनवरी 2025 में ही टीएसी (TAC) जांच के आदेश दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने मौके पर जाना भी मुनासिब नहीं समझा।

