रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
किरावली (आगरा): नगर में वर्षों से चली आ रही पेयजल समस्या के समाधान के लिए चेयरमैन प्रतिनिधि अभिजीत सिंह इंदौलिया ने सभासदों के साथ मिलकर ₹1 करोड़ 10 लाख की लागत वाले विकास कार्यों का शिलान्यास किया। जहाँ प्रशासन इसे एक बड़ी उपलब्धि बता रहा है, वहीं कुछ वार्डों में व्याप्त गंभीर जल संकट ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

किरावली में जल संकट: चेयरमैन प्रतिनिधि ने किया पाइपलाइन कार्य का शुभारंभ”
इन वार्डों में बिछेगी नई पाइपलाइन
चेयरमैन प्रतिनिधि अभिजीत सिंह इंदौलिया के अनुसार, नगर के कई हिस्सों में पुरानी पाइपलाइनें काफी गहरी और जर्जर हो चुकी थीं। बार-बार पाइपलाइन टूटने से घरों में नालियों का गंदा पानी पहुँच रहा था। इस समस्या के समाधान हेतु:
- वार्ड नंबर 5, 9, 11, 12 और 14 में नई पाइपलाइन डालने का कार्य शुरू किया गया है।
- वार्ड नंबर 14 में निर्माणाधीन पानी की टंकी से इन सभी वार्डों में जलापूर्ति की जाएगी।
- नगर के बाहर मीठे पानी की बोरिंग के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है, ताकि पूरे नगर को शुद्ध जल मिल सके।
शिलान्यास के दौरान सभासद गीतम सिंह, कमलेश इंदौलिया, गुलाब देवी, रिहाना, लाल बहादुर, दानिश और राहुल इंदौलिया (प्रतिनिधि वार्ड 10) सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
वोट बैंक की राजनीति या विकास में भेदभाव?
एक तरफ जहाँ पाइपलाइन डालने का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ नगर के कई वार्ड प्यासे हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं:
- फ्लाईओवर बना ‘अभिशाप’: वार्ड नंबर 4 में फ्लाईओवर निर्माण के दौरान पाइपलाइन कट गई थी। प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद अब तक सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
- वार्ड 7 की अनदेखी: इस वार्ड में भी पानी की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है।
- सभासद का आरोप: वार्ड नंबर 3 की सभासद गुलाबो देवी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके वार्ड में पाइपलाइन होने के बावजूद कनेक्शन नहीं किए गए हैं। उनका आरोप है कि जिन वार्डों में पहले से पाइपलाइन है, वहां दोबारा काम कराया जा रहा है, जबकि प्यासे वार्डों की अनदेखी की जा रही है।
सवाल: कब खुलेगी प्रशासन की नींद?
क्षेत्र में चर्चा है कि क्या विकास कार्य केवल उन्हीं वार्डों तक सीमित हैं जहाँ से सत्ता पक्ष को अधिक वोट मिले हैं? क्या प्यासे वार्डों की उपेक्षा सिर्फ ‘वोटों की राजनीति’ का हिस्सा है? नगर पंचायत प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि वार्ड 3, 4 और 7 की जनता को पानी के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा।

