किरावली (आगरा)। तहसील किरावली के गांव नागर में निर्माणाधीन रेलवे लाइन के कारण बंद हुए चकमार्ग को लेकर किसानों का आंदोलन और तेज हो गया है। धरने के 125वें दिन मंगलवार को प्रशासनिक और रेलवे के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन किसानों और अधिकारियों के बीच हुई वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही।
प्रशासन का ‘पक्का मार्ग’ प्रस्ताव किसानों ने नकारा
उप जिलाधिकारी (SDM) दिव्या सिंह, तहसीलदार दीपांकर, और रेल विकास निगम लिमिटेड के संयुक्त जनरल मैनेजर एस.के. वर्मा सहित एजीएम आर.पी. शर्मा ने धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की। अधिकारियों ने रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ पक्का मार्ग बनवाने का प्रस्ताव रखा।
हालांकि, किसानों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। किसानों का साफ कहना है कि उन्हें ‘पुल के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं’।
9 महीने से चल रहा है संघर्ष
किसान मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
“प्रशासन किसानों को गुमराह कर रहा है। पहले भी दो बार हुई वार्ता विफल रही है क्योंकि अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं, समाधान नहीं। हम पिछले 9 महीनों से ज्ञापन, प्रदर्शन और घेराव कर रहे हैं, लेकिन हमारी वाजिब समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।”
क्या है मुख्य समस्या?
- प्रभावित क्षेत्र: गांव नागर में चकरोड़ संख्या 24।
- कारण: कीथम-भांडई बाईपास तीसरी रेल लाइन के निर्माण से किसानों का मुख्य रास्ता बंद हो गया है।
- अतिरिक्त बोझ: रास्ता बंद होने से किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने के लिए 4 से 5 गुना अधिक लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
- मांग: किसान रेलवे पुल संख्या 31 और 32A के बीच चकमार्ग पर ही पुल निर्माण की मांग को लेकर 11 नवंबर से बेमियादी धरने पर बैठे हैं।
मौके पर मौजूद रहे ग्रामीण
धरना स्थल पर प्रमुख रूप से बच्चू सिंह प्रधान, सुखपाल सिंह, सौदान सिंह, सोनू नरवार, शिवराम सिंह, अजय पाल सिंह, गोविन्द सिंह, दर्याव सिंह, मुकेश, महेश सहित दर्जनों की संख्या में ग्रामीण और किसान मौजूद रहे। किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक पुल का ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
