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सड़क पर फरिश्ता बनने से अब डर कैसा? किरावली पुलिस ने ‘नेक मददगारों’ के लिए बिछाया सुरक्षा कवच

सड़क पर फरिश्ता बनने से अब डर कैसा? किरावली पुलिस ने 'नेक मददगारों' के लिए बिछाया सुरक्षा कवचसड़क पर फरिश्ता बनने से अब डर कैसा? किरावली पुलिस ने 'नेक मददगारों' के लिए बिछाया सुरक्षा कवच
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किरावली (आगरा): सड़क हादसों में घायल व्यक्ति के लिए ‘फरिश्ता’ बनने वालों को अब पुलिसिया कार्रवाई या अदालती चक्करों का डर नहीं सताएगा। आगरा पुलिस कमिश्नरेट के निर्देश पर थाना किरावली पुलिस ने मानवता को बढ़ावा देने के लिए एक शानदार गुड सेमरिटन’ (नेक मददगार) जागरूकता अभियान छेड़ा है।

चौराहों पर लगे ‘जागरूकता बोर्ड’: अब हर राहगीर जानेगा अपने अधिकार

थाना प्रभारी सत्यवीर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने क्षेत्र के सबसे व्यस्त और दुर्घटना संभावित इलाकों को चिन्हित कर वहां सूचना बोर्ड लगाए हैं। इन बोर्ड्स का मकसद राहगीरों के मन से कानूनी कार्रवाई का खौफ निकालना है।

प्रमुख स्थान जहाँ बोर्ड लगाए गए:

  • रायभा तिराहा
  • लेदर पार्क क्षेत्र
  • अछनेरा-किरावली चौराहा

क्या कहता है ‘गुड सेमरिटन’ कानून? (मददगारों के लिए 5 बड़ी राहत)

अक्सर लोग पुलिस के झमेले और कोर्ट-कचहरी के डर से घायलों को तड़पता छोड़ देते हैं। पुलिस ने इन बोर्ड्स के जरिए साफ किया है कि:

  1. कोई पूछताछ नहीं: घायल को अस्पताल लाने वाले से डॉक्टर या पुलिस बेवजह सवाल नहीं करेगी।
  2. गोपनीयता का सम्मान: मददगार की पहचान उसकी मर्जी के बिना उजागर नहीं की जाएगी।
  3. गवाही का दबाव नहीं: किसी को भी चश्मदीद गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
  4. पूर्ण स्वतंत्रता: अस्पताल पहुंचाने के तुरंत बाद मददगार वहां से जाने के लिए स्वतंत्र है।
  5. कानूनी कवच: नेक काम करने वालों को पूरी तरह कानूनी संरक्षण प्राप्त है।

‘गोल्डन ऑवर’ की अहमियत: एक कोशिश बचा सकती है जिंदगी

थाना प्रभारी सत्यवीर सिंह ने भावुक अपील करते हुए कहा:

“हादसे के बाद का पहला घंटा यानी ‘गोल्डन ऑवर’ सबसे कीमती होता है। अगर इस दौरान घायल को इलाज मिल जाए, तो उसकी जान बचने की उम्मीद 90% तक बढ़ जाती है। डरिए मत, आगे आइए और किसी का घर उजड़ने से बचाइए।”

पुलिस का संकल्प: संवेदनशीलता ही सुरक्षा है

इस पहल का मुख्य उद्देश्य समाज में संवेदनशीलता जगाना है। किरावली पुलिस का यह कदम न केवल लोगों को जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देगा, बल्कि सड़कों पर होने वाली असमय मौतों के आंकड़ों में भी कमी लाएगा।

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