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आगरा। जगरैला-रुनकता मार्ग की बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ चल रहा ग्रामीणों का संघर्ष अब जिले के सर्वोच्च स्तर तक पहुँच गया है। रास्ते की दुर्दशा का स्थाई समाधान निकालने की मांग को लेकर किसान नेताओं और प्रभावित ग्रामीणों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नव नियुक्त जिलाधिकारी (DM) मनीष बंसल से मुलाकात की। जिलाधिकारी ने पूरे मामले को गंभीरता से सुनते हुए ग्रामीणों को जल्द से जल्द समस्या का निस्तारण कराने का ठोस आश्वासन दिया है, जिसके बाद प्रभावित लोगों में एक बार फिर उचित कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
“बार-बार मामले को उलझा रहा स्थानीय प्रशासन”
जिलाधिकारी से मुलाकात के बाद किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह और धीरज सीकरवार ने स्थानीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
“ग्रामीणों की इस जायज और बुनियादी समस्या को स्थानीय प्रशासन बार-बार सुलझाने के बजाय उलझाने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों के इस ढुलमुल और उदासीन रवैये का खामियाजा जगरैला मोहल्ले के सैकड़ों गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के परिवारों को भयंकर जलभराव के बीच नारकीय जीवन जीकर भुगतना पड़ रहा है।”
किसान नेताओं ने एक बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि जब पूर्व में इसी रास्ते पर ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा योजना के तहत दो बार मिट्टी डलवाकर निर्माण कार्य कराया जा चुका है, तो अब तीसरी बार मिट्टी डलवाकर अस्थाई रास्ता दुरुस्त करने में आखिर क्या तकनीकी अड़चन आ रही है?

धरने से लेकर ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर तक: आंदोलन का पूरा घटनाक्रम
गौरतलब है कि जगरैला-रुनकता मार्ग की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा लंबे समय से उबल रहा है:
- 27 से 30 जून: प्रभावित ग्रामीणों और किसान नेताओं ने 27 जून को विकास खंड अछनेरा और 28 से 30 जून तक तीन दिन किरावली तहसील मुख्यालय पर अनवरत धरना-प्रदर्शन किया था।
- हाईवे जाम का एलान और 4 डम्पर की खानापूर्ति: एसडीएम के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपने निजी खर्च पर ट्रैक्टर व पंप लगाकर गड्ढों से पानी खाली कराया। लेकिन, 2 जुलाई तक मिट्टी न डलने पर जब ग्रामीणों ने आगरा-दिल्ली नेशनल हाईवे चक्का जाम करने की चेतावनी दी, तो प्रशासन ने आनन-फानन में महज 4 डम्पर मिट्टी डलवाकर पल्ला झाड़ लिया।
- मकान बिकाऊ हैं के पोस्टर: प्रशासन की इस ऊंट के मुंह में जीरा जैसी कार्रवाई से आक्रोशित ग्रामीणों ने अगले ही दिन अपने घरों पर “मकान बिकाऊ है” के पोस्टर चिपका दिए, जिससे शासन-प्रशासन में खलबली मच गई।
- जेसीबी और ट्रैक्टर का विरोध: उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जब अधीनस्थ टीम मौके पर पहुँची, तो उन्होंने बाहर से मिट्टी लाने के बजाय मौके की ही मिट्टी खोदकर रास्ता पाटने का प्रयास किया। ग्रामीणों द्वारा इसका कड़ा विरोध करने और बाहर से साफ मिट्टी डलवाने की मांग करने पर प्रशासन ने काम ही बंद कर दिया।
- CDO और DPRO का रुख: पुनः कार्य रुकने पर 8 जुलाई को ग्रामीणों ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) प्रतिभा सिंह को मामले से अवगत कराते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) कार्यालय पर धरना दिया। सीडीओ के निर्देश पर 12 जुलाई को डीपीआरओ मनीष कुमार और किरावली तहसीलदार दीपांकर मौके पर पहुँचे, लेकिन वे भी जमीन को ग्राम पंचायत की बताकर अपनी असमर्थता जताते हुए मामला जिलाधिकारी के पाले में डालकर लौट गए।
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे मौजूद
जिलाधिकारी मनीष बंसल से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से बाबूलाल बाल्मीकि, सुमन सिकरवार, नजमा खान, हेमंत जादौन, देवेंद्र सविता, नथिया देवी, किताबो श्री, गीता देवी, मालती देवी, बेबी देवी, पूनम, रामवती देवी, राजमाला, बसंती देवी, उषा धाकरे, प्रीति, रजनी, मीना, लक्ष्मी देवी, रश्मि देवी, शीला, लोकेश देवी, ललिता देवी, सविता देवी और शान्ति देवी सहित कई ग्रामीण शामिल रहे।

