किरावली (आगरा)। थाना किरावली क्षेत्र के कस्बा मिढ़ाकुर में शुक्रवार को हुए भीषण सड़क हादसे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। तेज रफ्तार पिकअप की टक्कर से 60 वर्षीय वृद्धा गंभीर रूप से घायल हो गईं, जबकि परिजनों ने मिढ़ाकुर चौकी इंचार्ज पर संवेदनहीनता दिखाने और आरोपी पक्ष के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है।

मिढ़ाकुर चौराहे के पास हुआ भीषण हादसा, दवा दिलाकर लौट रहे थे मां-बेटे
जानकारी के अनुसार, थाना जगदीशपुरा क्षेत्र के गांव लड़ामदा निवासी गजेंद्र सिंह अपनी मां लक्ष्मी देवी को दवा दिलाकर बाइक से घर लौट रहे थे। मिढ़ाकुर चौराहे के पास पीछे से आए तेज रफ्तार पिकअप वाहन (UP 80 GT 5539) ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में लक्ष्मी देवी के दोनों पैर वाहन के पहियों के नीचे आ गए, जिससे उनकी हड्डियां टूट गईं। गंभीर हालत में उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मिढ़ाकुर पुलिस की संवेदनहीनता: न्याय देने के बजाय पीड़ित पक्ष पर ही बनाया दबाव!
परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचे गजेंद्र सिंह को कार्रवाई का भरोसा देने के बजाय घंटों थाने में बैठाए रखा गया। आरोप है कि मिढ़ाकुर चौकी इंचार्ज ने आरोपी चालक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित पक्ष पर ही दबाव बनाया। इससे परिवार में भारी आक्रोश है।
रसूखदार की धमकी का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी पक्ष के समर्थन में क्षेत्र का एक कथित रसूखदार व्यक्ति सामने आया और अपनी राजनीतिक व प्रशासनिक पहुंच का हवाला देते हुए समझौते का दबाव बनाया। परिवार का कहना है कि उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने तथा जीवन बर्बाद कर देने तक की धमकियां दी गईं। यहां तक कि उन पर एक व्यक्ति के कथित अपहरण की झूठी कहानी गढ़ने का भी प्रयास किया गया।
एडिडनल डीसीपी के आने की भनक लगते ही मिढ़ाकुर पुलिस में मची खलबली
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब एडिशनल डीसीपी के थाने पहुंचने की सूचना मिली। आरोप है कि उच्चाधिकारी के आगमन की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस हरकत में आई और थाने में बैठे पीड़ित युवक को तत्काल छोड़ दिया। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।
अधिकारियों ने कही यह बात
थाना प्रभारी सतवीर सिंह ने पीड़ित को थाने में बैठाए जाने की जानकारी से अनभिज्ञता जताई है। वहीं एसीपी अछनेरा शैलेंद्र सिंह ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर आरोपी वाहन चालक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
मिढ़ाकुर सड़क हादसे और पुलिस की भूमिका पर उठते 4 गंभीर सवाल
सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल वृद्धा को न्याय दिलाने के बजाय पीड़ित पक्ष को ही थाने में क्यों बैठाया गया?
क्या स्थानीय पुलिस आरोपी पक्ष के प्रभाव में काम कर रही थी?
यदि एडिशनल डीसीपी के आने की सूचना न मिलती तो क्या पीड़ित युवक को छोड़ा जाता?
दुर्घटना के बाद संवेदनशीलता दिखाने के बजाय पुलिस पर दबाव बनाने के आरोप क्यों लगे?
घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय केवल हादसा नहीं, बल्कि मिढ़ाकुर चौकी इंचार्ज की कथित संवेदनहीनता और पुलिस की निष्पक्षता पर उठते सवाल बन गए हैं।

