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सिस्टम की बेरहमी: आवारा कुत्तों के हमले में राष्ट्रीय पक्षी मोर लहूलुहान, रातभर फोन करने के बाद भी नहीं पहुंची वन विभाग की टीमसिस्टम की बेरहमी: आवारा कुत्तों के हमले में राष्ट्रीय पक्षी मोर लहूलुहान, रातभर फोन करने के बाद भी नहीं पहुंची वन विभाग की टीम
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रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ

मलपुरा (आगरा)। ताजनगरी में प्रशासनिक संवेदनशीलता और वन विभाग के दावों की पोल खोलने वाला एक बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया है। थाना मलपुरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत मनकैड़ा के गांव नगला करें में बीती रात आवारा कुत्तों ने राष्ट्रीय पक्षी मोर पर जानलेवा हमला कर दिया। कुत्ते मोर को नोचते रहे और वह तड़पता रहा। इस घटना में मोर पूरी तरह से जख्मी हो गया है।

इस घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय किसान यूनियन महिला विंग की जिला अध्यक्ष सावित्री चाहर ने राष्ट्रीय पक्षी की जान बचाने के लिए मोर्चा संभाला, लेकिन रात से लेकर सुबह तक जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए रहे।

आधी रात से सुबह तक गुहार, केवल 112 नंबर आई काम

भाकियू महिला विंग की जिला अध्यक्ष सावित्री चाहर ने बताया कि रात करीब 2:30 बजे आवारा कुत्तों ने मोर पर हमला किया था। उन्होंने तुरंत ही मोर को कुत्तों से बचाया, जो गंभीर रूप से घायल हो चुका था। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय पक्षी के त्वरित इलाज और रेस्क्यू के लिए एसडीएम सदर से लेकर डीएम आगरा और वन विभाग के तमाम अधिकारियों को लगातार फोन किए।

हैरानी की बात यह है कि रात ढाई बजे से लेकर सुबह तक लगातार गुहार लगाने के बावजूद कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची। पूरी रात में केवल पुलिस की 112 पीआरवी वाहन ही रात करीब 3:30 बजे मौके पर पहुंची, लेकिन वन विभाग की टीम के न होने के कारण घायल मोर का रेस्क्यू और इलाज समय पर शुरू नहीं हो सका।

“सिस्टम की इस लापरवाही के खिलाफ सुबह ही बैठूंगी धरने पर”

प्रशासन और वन विभाग के इस ढुलमुल रवैये पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए भाकियू नेता सावित्री चाहर ने कहा, “इस लाचार और संवेदनहीन सिस्टम को क्या कहा जाए? जहां एक तरफ राष्ट्रीय पक्षी की जान खतरे में है, वहीं जिम्मेदार अधिकारी फोन उठाने और टीम भेजने तक की जहमत नहीं उठा रहे हैं।”

उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द वन विभाग की टीम मौके पर आकर घायल मोर का इलाज और सुरक्षित रेस्क्यू नहीं करती है, तो वह सुबह ही ग्रामीणों के साथ इस संवेदनहीन सिस्टम के खिलाफ गांव में ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगी

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