रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
आगरा। जगरैला-रुनकता रास्ते की दुर्दशा को लेकर ग्रामीण और किसान नेताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद भी रास्ता दुरुस्त करने का काम शुरू न होने पर ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। किसान नेताओं ने एलान किया है कि कल आगरा-दिल्ली नेशनल हाईवे पर उतरकर चक्का जाम किया जाएगा।
ग्रामीणों की मांग है कि जलभराव की समस्या से जूझ रहे रास्ते को तत्काल ठीक कराया जाए और इस लापरवाही के लिए रुनकता के ग्राम विकास अधिकारी (VDO) वीरेंद्र सिंह को तुरंत निलंबित किया जाए।
48 घंटे बाद भी नहीं शुरू हुआ काम, टूटा सब्र का बांध
जगरैला-रुनकता मार्ग की बदहाली को लेकर ग्रामीणों और किसान नेताओं ने शनिवार से मोर्चा खोल रखा है। उन्होंने एक दिन विकास खंड अछनेरा और तीन दिन किरावली तहसील मुख्यालय पर अनवरत धरना-प्रदर्शन किया था। आंदोलन के दबाव में उपजिलाधिकारी (SDM) और नायब तहसीलदार ने विकास खंड अधिकारी अछनेरा से तालमेल बिठाकर बुधवार से कच्चे रास्ते पर मिट्टी डलवाने का लिखित/मौखिक वायदा किया था।
किसान नेताओं का आरोप है कि वायदे के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई काम शुरू नहीं हुआ। जब अधिकारियों को इस बात से अवगत कराया गया, तब भी उन्होंने रास्ते की मरम्मत को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई। प्रशासन की इसी वायदाखिलाफ़ी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

‘दलित और पिछड़े समाज के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार’
किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह और धीरज सिकरवार ने तीखे शब्दों में कहा:
“अधिकारी और जनप्रतिनिधि जगरैला के दलित और पिछड़े समाज के वाशिंदों के साथ विकास के नाम पर सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। इस उपेक्षा और अपमान का आने वाले चुनावों में जनता मुंहतोड़ जवाब देगी।”
25-30 साल से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं ग्रामीण
प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि इस मोहल्ले में सैकड़ों दलित और पिछड़े समाज के परिवार पिछले 25 से 30 वर्षों से मकान बनाकर रह रहे हैं। मुख्य मार्ग से आवाजाही के लिए उनके पास यही एकमात्र रास्ता है। बरसात के दिनों में इस रास्ते की स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि यहाँ 5 से 6 फीट तक पानी भर जाता है, जिससे पूरा इलाका टापू में तब्दील हो जाता है और लोगों का घरों से निकलना दूभर हो जाता है।
पंचायत में ये लोग रहे मौजूद
आंदोलन की रणनीति तैयार करने के लिए आयोजित बैठक में मुख्य रूप से सुमन सिकरवार, मुकेश सविता, सत्यवीर चाहर, सोनू चौधरी, बाबूलाल बाल्मीकि, राजकुमार, भगवान सिंह, हरिओम सिंह धाकरे, राजू, देवेंद्र, ब्रज किशोर, अनिल कुमार, बबलू बाल्मीकि, मोनू, सुशील कुमार, भोले राजावत, विष्णु राजावत, संजू वर्मा, मालती देवी, पूनम, बसंती देवी, उषा धाकरे, प्रीति, रजनी, मीना, लक्ष्मी देवी, रश्मि देवी, शीला, लोकेश कुमारी और शान्ति देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।

