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तहसील किरावली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खेड़ा बाकंदा के ग्राम गुड़ा में बदहाल व्यवस्थाओं और रुके हुए विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है। गांव में जलभराव, टूटी सड़कें और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के चलते ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है।
आक्रोशित ग्रामीणों ने एकजुट होकर उपजिलाधिकारी (SDM) किरावली को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के तत्काल समाधान और पंचायत स्तर पर हुए विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

उपेक्षा का शिकार बना ग्राम गुड़ा
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत खेड़ा बाकंदा के वर्तमान प्रधान भुल्लन उर्फ बदन सिंह (निवासी खेड़ा) द्वारा ग्राम गुड़ा के साथ लगातार अनदेखी की जा रही है। ग्राम गुड़ा मुख्य गांव खेड़ा बाकंदा से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान का ध्यान केवल अपने गांव तक सीमित रहता है और वे गुड़ा गांव की समस्याओं का जायजा लेने तक नहीं आते।
जलभराव, ओवरफ्लो होती पोखर और बंद नल से गहराया संकट
पत्र के माध्यम से ग्रामीणों ने गांव की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया है:
- जल निकासी की विफलता: गांव की सभी गलियां और मुख्य रास्ते पानी से लबालब भरे हुए हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो चुका है।
- ओवरफ्लो होती पोखर: आबादी के बीच स्थित पोखर बारिश के मौसम में ओवरफ्लो हो जाती है, जिससे जलभराव की स्थिति और भयावह हो जाती है।
- खराब पड़े हैंडपंप: गांव में लगे अधिकांश सरकारी नल (हैंडपंप) लंबे समय से खराब पड़े हैं, जिससे गांव में पेयजल संकट गहरा गया है।
- श्मशान घाट पर असुविधा: श्मशान घाट पर टीन शेड या बुनियादी व्यवस्था न होने से अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
प्रशासनिक जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग
अशोक चौधरी, रविकुमार सहित समस्त ग्रामवासियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि प्रशासनिक अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करें और पंचायत में कराए गए कार्यों की जांच करें। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जल निकासी, रास्तों की मरम्मत, पेयजल व्यवस्था और श्मशान घाट की सुध नहीं ली गई, तो वे आगे की कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे।

