फतेहपुर सीकरी। क्षेत्र में शुक्रवार रात आए भीषण तूफान, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। अचानक बदले मौसम के मिजाज से खेतों में खड़ी और कटकर रखी हुई गेहूं की फसलें पूरी तरह पानी में डूब गईं, जिससे अन्नदाता को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

दर्जनों गांवों में हाहाकार, फसलें जलमग्न
शनिवार दोपहर तक क्षेत्र के कई गांवों में स्थिति अत्यंत गंभीर देखी गई। ओलावृष्टि से मई बुजुर्ग, दूरा, सरसा, सिकरौंदा, बानपुर, नगला हीरामन, जजऊ, मलिकपुर, इकराम नगर, रोज़ौली, बेमन, टीकरी, बसेरी, जैंगारा, सलेमाबाद, नगला बीच और लोरिया सहित दर्जनों गांवों में फसलों को व्यापक क्षति पहुंची है। खेतों में बिछी फसलें देख किसानों की आंखों में आंसू हैं।
हादसे में एक ही परिवार के 5 लोग घायल
ओलावृष्टि प्राकृतिक आपदा ने केवल फसलों को ही नहीं, बल्कि जान-माल को भी नुकसान पहुँचाया है। गांव मई बुजुर्ग में तूफान के कारण एक घर की छत गिर गई, जिसमें एक ही परिवार के पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में:
- अविद (35 वर्ष)
- सुल्ताना (33 वर्ष)
- मुस्कान (12 वर्ष)
- इजाजुल (3 वर्ष)
- नूरजहां (60 वर्ष) सभी घायलों को इलाज के लिए S.N. अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार चल रहा है।
समाजसेवी जीडी चाहर ने लिया जायजा
ओलावृष्टि नुकसान की सूचना मिलते ही समाजसेवी जीडी चाहर ने तत्काल प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने खेतों में जाकर नष्ट हुई फसलों का निरीक्षण किया और पीड़ित किसानों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान मौके पर हीरालाल, मंगल सिंह, उदय सिंह, पवन शर्मा, गंभीर, भीमसेन सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
सरकार से मुआवजे और कानून की मांग
जीडी चाहर ने सरकार से किसानों के हित में निम्नलिखित प्रमुख मांगें की हैं:
- ओलावृष्टि मुआवजा: प्रभावित किसानों को तत्काल 25 हजार रुपये प्रति बीघा की दर से राहत राशि दी जाए।
- आवास सहायता: जिन किसानों के मकान गिरे हैं, उन्हें जल्द से जल्द आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
- ठोस कानून: सदन में किसानों के लिए एक स्थायी मुआवजा कानून बनाया जाए ताकि भविष्य में आपदा के समय किसानों को भटकना न पड़े।
उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस संबंध में जिलाधिकारी (DM) को ज्ञापन सौंपा जाएगा। क्षेत्र के किसानों ने भी प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सर्वे कराकर राहत राशि वितरित की जाए।

