रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
किरावली (आगरा)। ताजनगरी के सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें अब कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस‘ नीति को ठेंगा दिखाते हुए किरावली थाना क्षेत्र में प्रतिदिन तड़के अंधेरे का फायदा उठाकर अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये ट्रैक्टर-ट्रॉलियां थाने के ठीक सामने से बेखौफ होकर गुजरती हैं, लेकिन पुलिस की खामोशी मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।

राजस्थान से आगरा तक ‘लाल गिट्टी’ का काला खेल
सूत्रों के अनुसार, राजस्थान की सीमा से सटे इलाकों से अवैध खंडों और लाल गिट्टी से लदे दर्जनों ट्रैक्टर प्रतिदिन आगरा के ग्रामीण क्षेत्रों में खपाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि माफियाओं ने पुलिस की नाक के नीचे अपना सुरक्षित गलियारा बना लिया है। सवाल यह है कि जब रात के सन्नाटे में भारी आवाज के साथ ये ट्रैक्टर थाने के सामने से निकलते हैं, तो ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को इनकी भनक क्यों नहीं लगती?
SDM के बयान से जनता में आक्रोश: ‘जिम्मेदारी या सिर्फ खानापूर्ति?’
इस पूरे प्रकरण पर जब उप जिलाधिकारी (SDM) किरावली, दिव्या सिंह से बात की गई, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला रहा। उन्होंने वीडियो साक्ष्यों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “वीडियो में जो ट्रैक्टर दिखाई दे रहे हैं, वे ढके हुए हैं, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि उनमें क्या लदा है।”
एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी का यह बयान अब चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का पूछना है कि क्या तिरपाल से ढके वाहनों की जांच करना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है? क्या “ढके हुए ट्रैक्टर” माफियाओं को कार्रवाई से बचने का नया लाइसेंस मिल गया है?
सड़कों पर बढ़ता खतरा, प्रशासन मौन
अवैध खनन में लगे ये अनियंत्रित ट्रैक्टर न केवल राजस्व को चूना लगा रहे हैं, बल्कि तेज रफ्तार के कारण ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर राहगीरों के लिए मौत का सबब बने हुए हैं। पर्यावरण और कानून-व्यवस्था दोनों ही दांव पर हैं। अब देखना यह होगा कि आगरा पुलिस कमिश्नर इस मामले का संज्ञान लेकर किरावली पुलिस और खनन माफियाओं के इस ‘गठजोड़’ पर कब नकेल कसते हैं।

