रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
अछनेरा (आगरा)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) अछनेरा के शौचालय में करीब सात माह का भ्रूण मिलने की सनसनीखेज घटना ने पूरे स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रोंगटे खड़े कर देने वाली इस घटना को सामने आए करीब 36 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन न तो भ्रूण को वहां छोड़ने वाली ‘अभागी मां’ का सुराग लग सका है और न ही अस्पताल प्रशासन सीसीटीवी फुटेज खंगाल पाया है।
सांकेतिक चित्र – केवल घटना के संदर्भ को समझाने के लिए उपयोग किया गया है

शनिवार रात सुरक्षा गार्ड ने देखा, पुलिस ने पीएम को भेजा
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार रात करीब 10 बजे जब अस्पताल के सुरक्षा गार्ड अजय शौचालय गए, तो उनकी नजर वहां पड़े भ्रूण पर पड़ी। इसके बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और तुरंत स्वास्थ्य विभाग सहित स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भ्रूण को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, लेकिन मामले की तफ्तीश जिस कछुआ गति से चल रही है, उसने पुलिस और प्रशासन की गंभीरता की पोल खोल दी है।
CHC अधीक्षक का अजीबोगरीब बयान: “रविवार था, आज फुटेज देखेंगे”
अस्पताल परिसर के भीतर इतनी बड़ी घटना हो गई और किसी को भनक तक नहीं लगी, इस पर स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लेकिन सबसे चौंकाने वाला बयान सीएचसी अधीक्षक का सामने आया है। अधीक्षक ने अपनी बेपरवाही छुपाते हुए तर्क दिया कि “रविवार होने के कारण सीसीटीवी फुटेज की जांच नहीं हो सकी, सोमवार (आज) फुटेज दिखवाते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक यह समझ में नहीं आ रहा है कि भ्रूण को शौचालय में कौन छोड़कर गया।
इधर, चर्चा है कि पुलिस ने भी शुरुआती घंटों में फुटेज खंगालने की जहमत नहीं उठाई, जिससे कई महत्वपूर्ण सुराग मिटने की आशंका पैदा हो गई है।
क्या अस्पताल में ही हुआ समय पूर्व प्रसव?
बता दें कि अछनेरा सीएचसी में सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) के साथ ऑपरेशन की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसके चलते प्रतिदिन दर्जनों गर्भवती महिलाएं यहां उपचार के लिए आती हैं। क्षेत्र में यह आशंका भी तेजी से जताई जा रही है कि कहीं किसी गर्भवती महिला का शौचालय में अचानक समय पूर्व प्रसव तो नहीं हो गया और वह लोक-लाज या किसी अन्य डर से बिना किसी को बताए वहां से चली गई? हालांकि, इस संभावना की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
अधिकारी मौन: स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहे बड़े प्रश्नचिह्न!
इस निंदनीय और गंभीर प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी भी पूरी तरह बेपरवाह नजर आ रहे हैं। इस घटना को लेकर जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अरुण श्रीवास्तव से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा। वहीं दूसरी तरफ, सोमवार को सीएचसी अधीक्षक अछनेरा ने भी फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। अधिकारियों का इस तरह मीडिया के फोन से दूरी बनाना यह बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इस निंदनीय घटना को दबाना या छुपाना चाहता है?
जवाब मांग रहे हैं ये सुलगते सवाल:
- 7 माह का भ्रूण आखिरकार सुरक्षित कहे जाने वाले सीएचसी के शौचालय तक कैसे पहुंचा?
- इतनी संवेदनशील घटना के 36 घंटे बाद भी सीसीटीवी फुटेज क्यों नहीं देखी गई? क्या रविवार को अपराधियों के लिए जांच बंद रहती है?
- हाई-टेक दावों के बीच अस्पताल परिसर में तैनात कर्मचारियों को किसी संदिग्ध गतिविधि की भनक क्यों नहीं लगी?
- यदि पूरे परिसर के प्रवेश-निकास और गलियारों में कैमरे लगे हैं, तो जांच में इतनी ढिलाई क्यों बरती जा रही है?
अब स्थानीय जनता और प्रबुद्ध वर्ग की निगाहें पुलिस और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं। देखना होगा कि क्या स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच इस रहस्यमयी मामले से पर्दा उठा पाती है या इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

