प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
रिपोर्टर कृष्ण मुरारी उपाध्याय
किरावली (आगरा): किरावली क्षेत्र के गांव भवनपुरा में एक किसान की संवेदनशीलता ने यह साबित कर दिया कि प्रकृति और मूक जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम आज भी ग्रामीण संस्कृति की असली पहचान है। खेत की जुताई के दौरान जैसे ही किसान की नजर एक मोरनी पर पड़ी, उसने तुरंत ट्रैक्टर रुकवा दिया। जांच करने पर खेत के बीचों-बीच मोरनी के चार अंडे मिले, जिसके बाद किसान ने खेती के काम से ज्यादा तरजीह उन मासूम जीवों की सुरक्षा को दी।
भिंडी की फसल कटने के बाद हो रही थी जुताई
जानकारी के अनुसार, नगला टोडू निवासी किसान राजवीर ने भवनपुरा निवासी गिरधारी लाल उपाध्याय का लगभग दो बीघा खेत बटाई (भेज) पर लिया था। खेत में भिंडी की फसल के बाद वह अगली फसल की तैयारी के लिए ट्रैक्टर से जुताई करवा रहे थे। इसी दौरान खेत में एक मोरनी को बार-बार उड़ते और बेचैन होते देख राजवीर को कुछ अनहोनी का अंदेशा हुआ। उन्होंने तुरंत ट्रैक्टर को रुकवाया और खुद जाकर देखा।
खेत के बीचों-बीच मिले चार अंडे, तुरंत रोकी जुताई
निरीक्षण करने पर खेत के बीचों-बीच मोरनी के चार अंडे सुरक्षित अवस्था में दिखे। यह दृश्य देखते ही राजवीर ने बिना किसी हिचकिचाहट के खेत की जुताई पूरी तरह बंद करवा दी। किसान राजवीर का कहना था कि यदि जुताई जारी रहती तो अंडे नष्ट हो जाते और उन बेजुबान जीवों का जीवन शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाता।
“फसल से बढ़कर किसी जीव की जान है। अंडों से जब तक बच्चे बाहर नहीं आ जाते, तब तक खेत की जुताई रोक दी गई है।”
— राजवीर (संवेदनशील किसान)

किसान नेताओं और ग्रामीणों ने की तारीफ
किसान के इस कदम की पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। किसान नेता चौधरी दिलीप सिंह, गंगाराम माहौर और देवेंद्र इंदौलिया समेत तमाम ग्रामीणों ने राजवीर के इस फैसले को वन्यजीव संरक्षण और मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।
पशु चिकित्साधिकारी की राय
इस संबंध में पशु चिकित्साधिकारी डॉ. गजेंद्र सिंह ने बताया कि मोरनी अपने अंडों की अत्यंत सावधानी से रक्षा करती है। अंडों से बच्चे निकलने के बाद भी वह लंबे समय तक उन्हें भोजन तलाशने और प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रहने का हुनर सिखाती है। ऐसे में किसान द्वारा घोंसले और अंडों को सुरक्षित रखना पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से एक बेहद सराहनीय पहल है।

