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रिपोर्टर कृष्ण मुरारी उपाध्याय
किरावली (आगरा):
तहसील कार्यालय किरावली की जर्जर इमारत कभी भी किसी बड़े और दर्दनाक हादसे का सबब बन सकती है। तहसील परिसर के बरामदे की छत का प्लास्टर पूरी तरह उखड़ चुका है और लोहे के जंग लगे सरिए साफ बाहर लटकते दिखाई दे रहे हैं। बदहाल हो चुके इस भवन की लंबे समय से सुध न लिए जाने के कारण यहाँ आने वाले फरियादियों और कर्मचारियों के सिर पर हर समय जान-माल का खतरा मंडरा रहा है।
अधिकारियों की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल
प्रतिदिन किरावली तहसील में अपनी फरियाद लेकर दूर-दराज के गांवों से सैकड़ों ग्रामीण पहुंचते हैं। जर्जर छत के नीचे खड़े होकर काम कराने को मजबूर गुस्साए फरियादियों ने प्रशासनिक रवैये पर सीधे सवाल खड़े किए हैं:
- “सबकी समस्याओं का समाधान करने का दावा करने वाले अधिकारियों को क्या अपने ही दफ्तर की यह बदहाली नजर नहीं आती?”
- “क्या जिम्मेदार महकमा किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? अगर काम कराने आए किसी पीड़ित पर प्लास्टर या छत गिर गई, तो इसका जवाबदेह कौन होगा?”

करोड़ों के बजट के बावजूद बदहाली
प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी भवनों के रखरखाव और विकास कार्यों के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये जारी किए जाने के बावजूद किरावली तहसील भवन की स्थिति दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है। ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि किसी अनहोनी का इंतजार किए बिना तहसील भवन की तुरंत मरम्मत कराई जाए।

