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रिपोर्टर कृष्ण मुरारी उपाध्याय
अछनेरा (आगरा)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) अछनेरा के शौचालय में सात माह का भ्रूण मिलने के बेहद संवेदनशील मामले में चौथे दिन एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। पुलिस ने मंगलवार को जब अस्पताल परिसर के सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू की, तो पता चला कि घटना के नजदीकी समय की करीब ढाई घंटे की रिकॉर्डिंग पूरी तरह गायब है। इस बड़े खुलासे के बाद अब स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सांकेतिक चित्र – केवल घटना के संदर्भ को समझाने के लिए उपयोग किया गया है
अछनेरा CHC भ्रूण कांड
शाम 5 से 7:30 बजे तक का वीडियो गायब,
मामले की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि सीसीटीवी रिकॉर्ड में शनिवार शाम करीब 5:00 बजे से लेकर रात 7:30 बजे तक की वीडियो फुटेज उपलब्ध ही नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को रात की ड्यूटी पर तैनात एक महिला चिकित्सक दोपहर करीब 2:00 बजे अस्पताल में आती हुई कैमरे में दिखाई दे रही हैं। वहीं, रात करीब 10:00 बजे सुरक्षा गार्ड अजय को शौचालय में भ्रूण मिला था।
हैरानी की बात यह है कि शौचालय के मुख्य गेट पर नजर रखने वाला विशेष कैमरा भी बंद पाया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि घटना के तुरंत बाद फुटेज क्यों नहीं देखे गए? जिम्मेदार अधिकारी लगातार पासवर्ड और तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर मामले को टालते रहे, और जब चौथे दिन जांच हुई तो सबसे महत्वपूर्ण समय का डेटा ही गायब मिला।
भ्रूण के पास मिला अस्पताल का तौलिया, मुख्यमंत्री पोर्टल पर हुई शिकायत
जांच के दौरान घटनास्थल से अस्पताल का एक तौलिया भी बरामद हुआ है, जबकि शौचालय के भीतर प्रसव (डिलिवरी) होने जैसी कोई स्पष्ट स्थिति या निशान नहीं पाए गए हैं। इस बीच, एक स्थानीय निवासी ने सीधे मुख्यमंत्री पोर्टल (आईजीआरएस) पर इस मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूरे मामले को दबाने और साक्ष्यों (सीसीटीवी फुटेज) के साथ तकनीकी छेड़छाड़ करने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ता ने डीवीआर (DVR) को तत्काल प्रभाव से फॉरेंसिक व तकनीकी जांच के लिए भेजने और स्वास्थ्य विभाग के पर्दा डालने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अछनेरा CHC भ्रूण कांड
जांच के घेरे में सुलगते सवाल:
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब लोगों की निगाहें पुलिस की तकनीकी जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं। आम जनता प्रशासन से इन सवालों के जवाब मांग रही है:
- घटना के सबसे महत्वपूर्ण वक्त की करीब ढाई घंटे की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग आखिर कहां गायब हो गई?
- फुटेज की जांच शुरू करने में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस द्वारा चार दिन की देरी क्यों की गई?
- क्या डीवीआर से रिकॉर्डिंग जानबूझकर डिलीट की गई है या साक्ष्यों को मिटाने के लिए कोई तकनीकी छेड़छाड़ हुई है?
- शौचालय में मिले भ्रूण के पास ‘अस्पताल का तौलिया’ पहुंचना क्या किसी अंदरूनी मिलीभगत की ओर इशारा करता है?
अस्पताल की लचर सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया की कछुआ गति ने अब इस पूरे मामले को गहरे रहस्य के घेरे में ला खड़ा किया है।

