रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
किरावली (आगरा), 20 जून। तहसील किरावली जिला आगरा स्थानीय बार एसोसिएशन के समस्त अधिवक्ताओं ने प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही ई-सिस्टम पंजीकृत प्रणाली के विरोध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम जिलाधिकारी आगरा के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा है. दिनांक 20 जून 2026 को सौंपे गए इस ज्ञापन में वकीलों ने नए सिस्टम से पैदा होने वाले आर्थिक संकट और सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है.

ई-सिस्टम प्रणाली से रोजगार पर संकट की आशंका
बार एसोसिएशन ने सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए वर्तमान व्यवस्था पर चिंता जताई है. अधिवक्ताओं का कहना है कि तहसील मुख्यालयों पर स्वतंत्र रूप से काम करने वाले दस्तावेज लेखक, स्टाम्प वैण्डर, टाइपिस्ट और नए अधिवक्ताओं का आर्थिक भविष्य इस ई-पंजीकृत प्रणाली (पीपीपी मॉडल) के लागू होने से बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है. निजीकरण की तरफ बढ़ रहे इन कदमों से प्राइवेट तौर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का आर्थिक भविष्य असुरक्षित हो जाएगा.
40 वर्षों से खाली पड़े हैं विभागों में पद
ज्ञापन में सरकारी विभागों की खस्ताहाली का भी जिक्र किया गया है. वकीलों ने आरोप लगाया कि शासन के अधीन संचालित:
- सिंचाई विभाग, समाज कल्याण विभाग, शिक्षा आधिकारिक
- पीडब्ल्यूडी (PWD), सेल टैक्स, परिवहन, राजकीय रोडवेज और राजस्व
जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अधिकारी और कर्मचारियों के पद पिछले 40 साल से रिक्त (पद विहीन) पड़े हैं. पुराने कर्मचारी सेवानिवृत हो चुके हैं, जिससे राजकीय विभागों के पटलों पर सरकारी कार्यों का संचालन प्रभावित हो रहा है.
नए वकीलों के लिए स्टाइपेंड और पेंशन की मांग
अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए बार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से विशेष वित्तीय सहायता की मांग की है:
- आर्थिक सहायता: नए युवा अधिवक्ताओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शुरुआती 5 साल तक ₹5000 प्रति माह बतौर आर्थिक सहायता दिलाई जाए.
- पेंशन व्यवस्था: यदि कोई अधिवक्ता 60 वर्ष की उम्र के बाद अपनी स्वेच्छा से वकालत छोड़ता है, तो उसे ₹5000 प्रति माह बतौर पेंशन दी जाए.
सिस्टम लागू करने से पहले आत्ममंथन की अपील
बार एसोसिएशन ने कहा कि सेना और पुलिस को छोड़कर लगभग सभी विभागों का निजीकरण हो रहा है. यदि ई-पंजीकृत सिस्टम प्रणाली को बिना सुधार के लागू किया गया, तो आम लोगों का मोह सरकार से भंग हो सकता है. इसलिए इस मॉडल को पूरी तरह प्रभावी करने से पूर्व सरकार को इन बिंदुओं पर आत्ममंथन करना चाहिए.
पत्र पर इनके रहे हस्ताक्षर
इस ज्ञापन पत्र को सौंपने के दौरान मुख्य रूप से मोर ध्वज सिंह इंदौलिया बार एसोसिएशन किरावली (आगरा) के महासचिव , गुरुवेंद्र चौधरी और बार एसोसिएशन किरावली (आगरा) के समस्त तमाम पदाधिकारी व स्थानीय अधिवक्ता मौजूद रहे.

