रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
किरावली/अछनेरा (आगरा)। ग्राम पंचायत रुनकता के जगरैला मोहल्ले के रास्ते की दुर्दशा और जलभराव को लेकर चल रहा ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन तीसरे दिन और अधिक गर्मा गया है। तीन दिन बीत जाने के बाद भी तहसील प्रशासन इस गंभीर समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकाल सका है। आज धरने के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब उप जिलाधिकारी (एसडीएम) किरावली और आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान नेता चौधरी दिलीप सिंह के बीच तीखी नोंकझोंक हो गई। प्रशासन के अड़ियल रवैये से गुस्साए ग्रामीणों ने अब कल (बुधवार को) जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) पहुंचकर जिलाधिकारी का दरवाजा खटखटाने का बड़ा ऐलान कर दिया है।
“आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए” — एसडीएम से भिड़े किसान नेता चौधरी दिलीप सिंह
तीसरे दिन तहसील मुख्यालय पर चल रहे धरने के दौरान उप जिलाधिकारी किरावली एक बार फिर आंदोलनकारियों को समझाने पहुंचे। एसडीएम ने जब ग्रामीणों को आश्वासन देने की कोशिश की, तो किसान नेता चौधरी दिलीप सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि “हमें सालों से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है, अब आश्वासन नहीं, सीधा समाधान चाहिए।” इस बात को लेकर उप जिलाधिकारी और किसान नेता के मध्य काफी देर तक तीखी नोंकझोंक और गर्मागर्मी होती रही।
आंदोलनकारियों से मिले फतेहपुर सीकरी विधायक चौधरी बाबूलाल, कल मौके पर पहुंचेंगे
आंदोलन की गूंज सुनकर फतेहपुर सीकरी के क्षेत्रीय विधायक चौधरी बाबूलाल भी आज प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने पीड़ित ग्रामीणों और किसान नेताओं से मुलाकात कर उनकी पूरी व्यथा सुनी। विधायक चौधरी बाबूलाल ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि इस समस्या का हर हाल में समाधान कराया जाएगा। उन्होंने आंदोलनकारियों से वादा किया कि वे स्वयं कल (बुधवार को) ग्राउंड जीरो (जगरैला मोहल्ला) पर पहुंचेंगे और मौके पर ही अधिकारियों को बुलाकर निस्तारण की रूपरेखा तय करेंगे।
भीषण गर्मी का कहर: बुजुर्ग महिला और बाबूलाल बाल्मीकि की बिगड़ी तबीयत, सीएचसी में भर्ती
तहसील परिसर में पड़ रही भीषण और जानलेवा गर्मी के बीच आंदोलन कर रहे दो प्रदर्शनकारियों की तबीयत अचानक बुरी तरह बिगड़ गई। आंदोलनकारी बुजुर्ग महिला नज़मा खान और बाबूलाल बाल्मीकि गर्मी के कारण गश खाकर गिर पड़े, जिससे धरना स्थल पर हड़कंप मच गया। दोनों को तुरंत आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) किरावली में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में इलाज के बाद देर शाम तक दोनों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।

30 सालों से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं सैकड़ों परिवार
आपको बता दें कि जगरैला मोहल्ले में पिछले 25 से 30 वर्षों से सैकड़ों दलित और पिछड़े समाज के परिवार मकान बनाकर रह रहे हैं। इन प्रभावित ग्रामीणों के लिए मुख्य मार्ग से आवाजाई का एकमात्र रास्ता बदहाल है। स्थिति इतनी वीभत्स है कि बरसात के दिनों में यह रास्ता 5 से 6 फुट तक जलमग्न हो जाता है, जिससे पूरा मोहल्ला टापू में तब्दील हो जाता है।
तीसरे दिन भी डटे रहे आंदोलनकारी, ये लोग रहे मौजूद
भीषण गर्मी और तमाम दिक्कतों के बावजूद तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं धरने पर डटे रहे। इस दौरान मुख्य रूप से किसान नेता धीरज सिकरवार, सुमन सिकरवार, मुकेश सविता, सत्यवीर चाहर, सोनू माहौर, राजकुमार, भगवान सिंह, हरिओम सिंह धाकरे, राजू, देवेंद्र, संदीप परमार, अनिल कुमार, बबलू, मोनू, सुशील कुमार, भोले राजावत, विष्णु राजावत, संजू वर्मा, मालती देवी, पूनम, बसंती देवी, उषा धाकरे, प्रीति, रजनी, मीना, लक्ष्मी देवी, रश्मि देवी, शीला, लोकेश कुमारी व शान्ति देवी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

