रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
किरावली (आगरा)। रुनकता (अछनेरा) के नगला जगरेला के ग्रामीणों को उनका हक दिलाने के लिए किरावली तहसील परिसर में चल रहा महाधरना आखिरकार चौथे दिन बड़ी जीत के साथ समाप्त हो गया। प्रखर किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह (दिलीप चौधरी) के बेबाक नेतृत्व और अडिग रुख के आगे आखिरकार तहसील प्रशासन को घुटने टेकने ही पड़े। मंगलवार को आंदोलन के उग्र रूप और प्रशासनिक अमले में मचे हड़कंप के बीच उपजिलाधिकारी (एसडीएम) किरावली और नायब तहसीलदार राजपाल ने खुद धरना स्थल पर पहुंचकर कल (बुधवार) से ही रास्ते को दुरुस्त करने का काम शुरू कराने का पक्का वायदा किया। इसके बाद किसान नेता दिलीप चौधरी ने ग्रामीणों की सहमति से धरना समाप्त करने की घोषणा की।
दिलीप चौधरी की हुंकार- “वायदाखिलाफी हुई तो प्रशासन झेलेगा गंभीर परिणाम”
धरने की सफलता पर ग्रामीणों को बधाई देते हुए किसान नेता चौधरी दिलीप सिंह और किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने प्रशासन को कड़े लहजे में चेतावनी दी। दिलीप चौधरी ने दोटूक कहा:
“यह सैकड़ों शोषित, दलित और पिछड़े परिवारों के स्वाभिमान की जीत है। प्रशासन यह अच्छी तरह समझ ले कि अगर कल सुबह से मौके पर काम शुरू नहीं हुआ और हमारे साथ कोई भी वायदाखिलाफी या टालमटोल की गई, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अगली बार यह आंदोलन इससे भी बड़े और उग्र रूप में सीधे सड़कों पर दिखेगा।”

4 दिन से किरावली तहसील में जारी आंदोलन ग्रामीणों की जीत के साथ समाप्त
जब एसडीएम से भिड़ गए थे दिलीप चौधरी
इस पूरे आंदोलन के दौरान दिलीप चौधरी का नेतृत्व बेहद मजबूत रहा। धरने के दौरान जब आंदोलनकारी महिला नाज़मा खान की तबीयत बिगड़ने पर एसडीएम किरावली अभिनव पाठक मौके पर पहुंचे और उन्होंने आंदोलन पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया, तो दिलीप चौधरी ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए एसडीएम को करारा जवाब दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि अपने अधिकारों और बुनियादी रास्तों के लिए लड़ना अराजकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार है। उनके इसी कड़े रुख के कारण आज प्रशासन को झुकना पड़ा।

4 दिन से किरावली तहसील में जारी आंदोलन ग्रामीणों की जीत के साथ समाप्त
रालोद नेता बृजेश चाहर और जिला पंचायत सदस्य ने भी दिया दिलीप चौधरी का साथ
चौधरी दिलीप सिंह के इस जमीनी संघर्ष को देखकर क्षेत्र के बड़े राजनीतिक दिग्गजों को भी समर्थन में आना पड़ा। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के वरिष्ठ नेता व क्षेत्रीय अध्यक्ष बृजेश चाहर ने धरना स्थल पर पहुंचकर दिलीप चौधरी के संघर्ष को सलाम किया और सरकार में साझीदार होते हुए भी उच्चाधिकारियों को फोन लगाकर तत्काल समाधान करने का दबाव बनाया। वहीं जिला पंचायत सदस्य शिवपाल बंटी सिकरवार ने भी मौके पर पहुंचकर भाई दिलीप चौधरी और ग्रामीणों को हर कदम पर सहयोग देने का पूरा भरोसा दिया।
25-30 साल पुराना दर्द, जिसे दिलीप चौधरी ने दिलाई मुक्ति
नगला जगरेला (रुनकता) मोहल्ले में पिछले 25 से 30 वर्षों से सैकड़ों दलित और पिछड़े समाज के परिवार नारकीय जीवन जीने को मजबूर थे। मुख्य मार्ग से जुड़ने वाला एकमात्र रास्ता बरसात के दिनों में 5 से 6 फुट तक पानी में डूब जाता था, जिससे लोग अपने ही घरों में कैद हो जाते थे। इस गंभीर समस्या को उठाकर किरावली तहसील में 4 दिनों तक दिन-रात डटे रहने वाले दिलीप चौधरी के नेतृत्व ने आखिरकार ग्रामीणों को इस समस्या से मुक्ति दिला दी।
धरने के समापन पर ये लोग रहे मौजूद
दिलीप चौधरी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन को सफल बनाने में मुख्य रूप से किसान नेता धीरज सिकरवार,भूपेंद्र सिंह इंदौलिया , सुमन सिकरवार, मुकेश सविता, सत्यवीर चाहर, सोनू चौधरी, राजकुमार, भगवान सिंह, हरिओम सिंह धाकरे, राजू, देवेंद्र, संदीप परमार, अनिल कुमार, बबलू, मोनू, सुशील कुमार, भोले राजावत, विष्णु राजावत, संजू वर्मा सहित मालती देवी, पूनम, बसंती देवी, उषा धाकरे, प्रीति, रजनी, मीना, लक्ष्मी देवी, रश्मि देवी, शीला, लोकेश कुमारी व शान्ति देवी आदि सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।

