रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
आगरा/सदर तहसील। आगरा पुलिस कमिश्नरेट के थाना सिकंदरा प्रभारी प्रदीप कुमार त्रिपाठी विवादों के घेरे में हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सदर तहसील प्रांगण में चल रहा आंदोलन अब बेहद उग्र रूप ले चुका है। किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह के नेतृत्व में पिछले 204 दिनों से बेमियादी धरना जारी है, वहीं मांगें पूरी न होने पर अब भूख हड़ताल का चौथा दिन भी पूरा हो चुका है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि इतने लंबे आंदोलन के बावजूद अब तक पुलिस या प्रशासन का कोई भी आला अधिकारी आंदोलनकारियों की सुध लेने नहीं पहुंचा है।
क्या है पूरा मामला?
किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ने बताया कि पूरा मामला पिछले साल का है। थाना अछनेरा के गांव जनूथा निवासी दिनेश, अरतौनी के पास स्थित राशन बॉक्स प्राइवेट लिमिटेड में मजदूरी करता था। 11 अक्तूबर की रात को चाय लाते समय सड़क हादसे में दिनेश की मौत हो गई थी।
परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर शव गोदाम के बाहर रखकर प्रदर्शन शुरू किया था, जिसमें चौधरी दिलीप सिंह भी समर्थकों के साथ पहुंचे थे। आरोप है कि मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष सिकंदरा प्रदीप कुमार त्रिपाठी ने मृतक श्रमिक के परिजनों से अभद्रता की और मुकदमा दर्ज करने की धमकी दी।

किसान नेता को हवालात में बंद करने का आरोप
जब चौधरी दिलीप सिंह ने पुलिस की इस अभद्रता का विरोध किया, तो थानाध्यक्ष बौखला गए। आरोप है कि उन्होंने किसान नेता के साथ गाली-गलौज और अभद्रता करते हुए उन्हें घसीटकर थाने की गाड़ी में बैठा लिया और हवालात में बंद कर दिया। इस अवैध हिरासत के विरोध में परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया, जिसके बाद बैकफुट पर आई पुलिस ने करीब 1 घंटे बाद चौधरी दिलीप सिंह को छोड़ा।
शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, 30 मई से भूख हड़ताल
- 15 अक्तूबर: मामले की लिखित शिकायत पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) दीपक कुमार से की गई।
- 4 नवंबर: सदर तहसील प्रांगण में किसान-मजदूरों ने महापंचायत कर इंस्पेक्टर पर कार्रवाई की मांग की।
- 12 नवंबर: कोई सुनवाई न होने पर चौधरी दिलीप सिंह सहयोगियों के साथ बेमियादी धरने पर बैठ गए।
- 30 मई: धरने के 200 दिन पूरे होने पर भी कार्रवाई न होने से मजबूर होकर बाबूलाल बाल्मीकि बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं, जिसका आज चौथा दिन है।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो कई अन्य आंदोलनकारी भी सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। धरने में मुख्य रूप से प्रदीप राणा, भूपेंद्र सिंह लोधी, पूरन सिंह, पदम सिंह, भगवान सिंह बघेल, राजकिशोर लोधी, धीरज सिकरवार, रामखिलाड़ी कुशवाह, देवेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
बड़ा सवाल: आखिर सिकंदरा थाना प्रभारी पर किसकी ‘मेहरबानी’?
क्षेत्र में लगातार उठ रहे मामलों के बाद अब जनता और संगठनों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर सिकंदरा थाना प्रभारी पर किसका वरदहस्त है?
- अवैध गतिविधियों पर चुप्पी: हाल ही में क्षेत्र में जुए के फड़ का वीडियो और कथित ऑडियो वायरल होने के बावजूद थाना प्रभारी पर कोई गाज नहीं गिरी।
- पूर्व फौजी से बदसलूकी का मामला: इससे पहले एक पूर्व फौजी को अवैध हिरासत में लेने पर फौजी संगठनों ने बड़ा प्रदर्शन किया था, जिसका कारण भी यही थाना प्रभारी थे।
- युवक की अवैध गिरफ्तारी: पूर्व में एक और युवक को अवैध तरीके से गिरफ्तार करने का मामला भी सुर्खियों में आ चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसा कोई गंभीर मामला किसी अन्य थाने का होता, तो अब तक थाना प्रभारी सस्पेंड या लाइन हाजिर हो चुके होते। लेकिन 204 दिनों से तहसील में धरना चलने के बाद भी पुलिस कमिश्नरेट की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है। अब देखना यह है कि थाना प्रभारी सिकंदरा पर कब तक आला अधिकारियों या ‘सफेदपोशों’ की यह मेहरबानी बरकरार रहती है।

