रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
आगरा (तहसील सदर)। सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता और बिजली विभाग की वादाखिलाफी के खिलाफ हक की लड़ाई लड़ रहे एक बेबस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। तहसील सदर प्रांगण में पिछले 205 दिनों से धरने पर बैठे मृतक बिजलीकर्मी रवि सोलंकी के परिवार में उस समय हड़कंप मच गया, जब न्याय की मांग को लेकर 30 मई से आमरण अनशन (बेमियादी भूख हड़ताल) पर बैठीं उनकी 72 वर्षीय वृद्ध मां प्रभा देवी की पांचवें दिन तबीयत अत्यधिक बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर प्रशासन ने आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया है।

क्या है पूरा मामला?
33/11 विद्युत उपकेंद्र किरावली टाउन पर 38 वर्षीय पेट्रोलमैन रवि सोलंकी पिछले 20 वर्षों से संविदा पर कार्यरत थे। पिछले वर्ष 9 अप्रैल 2025 को विभाग के लापरवाह अधिकारियों की बड़ी चूक सामने आई। तहसील किरावली के सामने ट्रांसफार्मर की मरम्मत के दौरान शटडाउन होने के बावजूद लाइन में करंट आ गया, जिससे रवि गंभीर रूप से झुलस गए। एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद 15 अप्रैल 2025 को एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
अधिकारियों की वादाखिलाफी और अधूरा इंसाफ
रवि सोलंकी की मौत के बाद बिजली विभाग के आला अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए बड़े-बड़े वादे किए थे, जो आज तक अधूरे हैं:
- वादा: ₹15 लाख की आर्थिक मदद, इलाज का पूरा खर्च, पत्नी व बच्चों को पेंशन और आश्रित को संविदा पर नौकरी।
- हकीकत: परिवार को केवल ₹7.50 लाख की अनुग्रह राशि मिली है। इसके अलावा, हाल ही में जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद फंड के ₹3 लाख 23 हजार की राशि मिल सकी है। बाकी के वादे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
13 महीनों से भटक रहा परिवार, 12 नवंबर से चल रहा धरना हक और न्याय के लिए मृतक का परिवार पिछले 13 महीनों से अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। जब पुलिस, प्रशासन और बिजली विभाग ने आंखें मूंद लीं, तो मजबूर होकर 12 नवंबर से मृतक की 72 वर्षीय मां प्रभा देवी, पत्नी रजनी देवी और उनके तीन मासूम बच्चे तहसील सदर प्रांगण में बेमियादी धरने पर बैठ गए। आज इस धरने को 205 दिन पूरे हो चुके हैं।
“अधिकारी अंधे-बहरे और जनप्रतिनिधि मूकदर्शक”
धरने का समर्थन कर रहे किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ने प्रशासनिक रवैये पर तीखा प्रहार करते हुए कहा:
“सरकारी सिस्टम पूरी तरह संवेदनहीन हो चुका है। अधिकारी अंधे और बहरे हो चुके हैं, जिन्हें एक वृद्ध मां की चीखें सुनाई नहीं दे रही हैं। सत्ता में बैठे क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी इस मामले पर मूकदर्शक बने हुए हैं। न तो पीड़ित परिवार को पूरी आर्थिक मदद मिली है और न ही रवि सोलंकी की मौत के जिम्मेदार लापरवाह बिजली अधिकारियों पर कोई कानूनी या विभागीय कार्रवाई की गई है।”
धरने में शामिल रहे प्रमुख लोग
इस न्याय की लड़ाई में परिवार के साथ प्रदीप राणा, पवन सिंह चाहर, सुरेंद्र सोलंकी, बाबूलाल, अरविंद कुमार, भगवान सिंह, राजकिशोर, शशि और मृतक की पत्नी रजनी देवी समेत कई लोग मुस्तैदी से डटे हुए हैं। परिवार का साफ कहना है कि जब तक उन्हें न्याय, पूरी आर्थिक मदद और नौकरी का हक नहीं मिल जाता, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

