रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
फतेहपुर सीकरी (आगरा)।
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक नगरी फतेहपुर सीकरी में इन दिनों पर्यटकों की सुरक्षा और सम्मान पूरी तरह रामभरोसे है। सीकरी में ‘लपकों’ (अवैध गाइडों और ठगों) का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि यहाँ आने वाले देश-विदेश के पर्यटक खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
पार्किंग गेट से लेकर मुख्य परिसर तक आस्था और वीआईपी एंट्री के नाम पर वसूली का गंदा खेल धड़ल्ले से चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि पुरातत्व विभाग (ASI), स्थानीय पुलिस और पर्यटन पुलिस सब कुछ जानकर भी आंखें मूंदे बैठी है।
ठगी का ‘सीकरी मॉडल’: मन्नत के नाम पर हजारों की चपत
स्थानीय सूत्रों और पीड़ितों से मिली जानकारी के मुताबिक, जैसे ही पर्यटकों के वाहन पार्किंग गेट पर रुकते हैं, लपकों का झुंड उन्हें चारों तरफ से घेर लेता है। ठगी के लिए मुख्य रूप से दो हथकंडे अपनाए जा रहे हैं:
- पहला हथकंडा (फर्जी गाइड): खुद को सरकारी गाइड या रसूखदार बताकर पर्यटकों पर मानसिक दबाव बनाया जाता है। “हमारे बिना अंदर एंट्री नहीं मिलेगी” या “हम VIP रास्ते से बिना लाइन के ले चलेंगे” जैसे झूठे वादे करके मोटी रकम ऐंठी जाती है।
- दूसरा हथकंडा (धार्मिक ब्लैकमेलिंग): पर्यटकों की धार्मिक आस्था का फायदा उठाकर शेख सलीम चिश्ती की दरगाह में चादर चढ़ाने और “मन्नत के धागे” के नाम पर जबरन हजारों रुपये वसूल लिए जाते हैं। यदि कोई पर्यटक मना करे या विरोध करे, तो ये लपके बदतमीजी और गाली-गलौज पर उतारू हो जाते हैं।
पीड़ित पर्यटकों का छलका दर्द: “सीकरी आना हमारी भूल थी”
दिल्ली के पर्यटक की आपबीती:
नाम न छापने की शर्त पर एक पर्यटक ने बताया, “पार्किंग पर उतरते ही 4-5 लड़कों ने हमें घेर लिया। बेहतर सुविधा और गाइड करने के नाम पर हमसे ₹2100 ऐंठ लिए गए। अंदर जाने के बाद न तो कोई सुविधा मिली और न ही किसी ने सही से गाइड किया। हम ठगे रह गए।”
मेरठ की महिला पर्यटक का दर्द:
“मेरे हाथ में छोटे बच्चे को देखकर एक लपके ने बच्चे की सलामती और मन्नत के नाम पर जबरन ₹500 छीन लिए। यहाँ आस्था के नाम पर सिर्फ धंधा और डराने का खेल चल रहा है।”
बदनाम हो रहा पर्यटन, स्थानीय कारोबारियों में भारी आक्रोश
लपकों के इस संगठित रैकेट के कारण न केवल फतेहपुर सीकरी और ताजनगरी आगरा की छवि वैश्विक स्तर पर धूमिल हो रही है, बल्कि असली व लाइसेंस प्राप्त गाइडों और स्थानीय ईमानदार दुकानदारों का रोजगार भी ठप हो रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस गुंडागर्दी और डर के माहौल के कारण पर्यटकों ने अब सीकरी आने से कतराना शुरू कर दिया है।
बड़ा सवाल: पर्यटन पुलिस चौकी की नाक के नीचे कैसे चल रहा खेल?
फतेहपुर सीकरी में पर्यटकों की सुरक्षा के लिए बकायदा ‘पर्यटन पुलिस चौकी’ मौजूद है। इसके बावजूद पार्किंग गेट जैसे मुख्य संवेदनशील पॉइंट पर लपकों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं?
- पुरातत्व विभाग (ASI) और स्थानीय प्रशासन इस अवैध वसूली को रोकने में नाकाम क्यों साबित हो रहा है?
- हर रोज होने वाली शिकायतों के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
- क्या इस पूरे खेल के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है?
प्रशासनिक रुख: किरावली उपजिलाधिकारी ने दिए जांच के आदेश
इस गंभीर मामले को लेकर जब किरावली के उपजिलाधिकारी (SDM) अभिनव पाठक से बात की गई, तो उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा:
“मामला पूरी तरह से मेरे संज्ञान में आ गया है। पर्यटकों से इस तरह की ठगी और बदतमीजी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की पूरी जांच करवाकर दोषियों और अवैध लपकों के खिलाफ उच्च स्तरीय व कड़ी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”
अब देखना यह होगा कि प्रशासन का यह चाबुक इन लपकों पर कब चलता है या फिर सीकरी की साख इसी तरह सरेबाजार नीलाम होती रहेगी।

