रिपोर्ट: प्रदीप चौधरी चैनल हेड UP Live 24X7 खबर सच के साथ
विश्व पर्यावरण दिवस पर पुरुषार्थ सेवा संगठन द्वारा ग्राम दूरा में पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन दूरा में संचालित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम व विश्राम दिवस के अवसर पर किया गया, जहां संगठन के पदाधिकारियों ने अध्यात्म के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का एक बेहद खूबसूरत संदेश दिया।

संतों का स्वागत और श्रद्धालुओं को तुलसी व फलदार पौधों का वितरण
कार्यक्रम की शुरुआत में संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने व्यासपीठ, मुख्य परीक्षित तथा कथा में पधारे हुए पूज्य संत-महात्माओं का माल्यार्पण व अंगवस्त्र भेंट कर भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। इसके पश्चात कथा पंडाल में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं के मध्य पौधों का वितरण किया गया।
प्रकृति और आस्था को जोड़ते हुए:
- महिला श्रद्धालुओं को: पवित्र तुलसी के पौधे वितरित किए गए।
- पुरुष श्रद्धालुओं को: पर्यावरण को शुद्ध रखने वाले फलदार एवं छायादार पौधे भेंट किए गए।
बच्चों को कॉपी-पेन बांटकर शिक्षा के लिए किया प्रेरित
पर्यावरण चेतना के साथ-साथ पुरुषार्थ सेवा संगठन ने सामाजिक सरोकार भी निभाया। कार्यक्रम के दौरान गाँव में पढ़ाई कर रहे जरूरतमंद बच्चों को कॉपी एवं पेन वितरित किए गए, ताकि वे शिक्षा के प्रति और अधिक प्रोत्साहित हो सकें।
इस अवसर पर संगठन के वक्ताओं ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी और गंभीर आवश्यकता है। आज जिस तरह से गर्मी और प्रदूषण बढ़ रहा है, उससे बचने का एकमात्र रास्ता वृक्षारोपण ही है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के विशेष अवसरों पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और केवल लगाना ही नहीं, बल्कि उसके बड़े होने तक उसके संरक्षण का संकल्प भी लेना चाहिए।
ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि सहित क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोग रहे मौजूद
दूरा ग्राम में आयोजित इस सराहनीय कार्यक्रम में ब्रज क्षेत्र और स्थानीय राजनीति व समाज के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए।
उपस्थित मुख्य अतिथि एवं गणमान्य जन: ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि गुड्डू चाहर, रूप सिंह आर्य, तुलाराम कहरवार, अशोक कुमार, राकेश कहरवार, पुष्पेंद्र कहरवार, जिगनेश कहरवार, विराट कहरवार, विपिन अग्रवाल, चंद्रभान कहरवार, पदम सिंह आरपीएफ, जितेंद्र राणा, विपिन सोनी, गौरव गर्ग, भगवान स्वरूप, हुकुम सिंह, भरत राजपूत, रंजीत सिंह, सोनवीर पैलवार, शिवशंकर आर्य सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और माताएं-बहनें मौजूद रहीं।

